- मथुरा की नामी कंपनी ने नोएडा में दूसरे नाम से लाँच किया था आवासीय प्रोजेक्ट
- डेवलपर्स और बैंकों के गठजोड़ से सबवेंशन स्कीम का उपयोग कर घर खरीदारों को ठगा गया था
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने दर्ज किया था मुकदमा, बुधवार को हुई थी सुनवाई
राजेश मिश्रा: डेवलपर्स और बैंकों के अपवित्र गठजोड़ द्वारा घर खरीदारों से ठगी के मामले में सीबीआई द्वारा दाखिल चार्जशीट पर सुनवाई करते हुए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आरोपितों की कस्टडोयल इंटेरोगेशन क्यों नहीं की गई? सुप्रीम कोर्ट की ये फटकार मथुरा के एक बिल्डर के लिए मुसीबत बन सकती है। क्योंकि इस मामले में ये बिल्डर भी आरोपित है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने पिछले वर्ष मुकदमा दर्ज किया था। इसमें मथुरा के बिल्डर सहित कई अन्य डेवलपर्स आरोपित बनाए गए थे। रियल एस्टेट में मथुरा की इस नामी कंपनी ने नोएडा में दूसरे नाम से आवासीय प्रोजेक्ट लांच किया था। आरोप था कि डेवलपर्स और बैंकों के अपवित्र गठजोड़ ने सबवेंशन स्कीम का उपयोग करके घर खरीदारों के साथ ठगी की है। सबवेंशन स्कीम के तहत, बैंक स्वीकृत राशि सीधे बिल्डरों के खातों में वितरित करते हैं, जिन्हें तब तक स्वीकृत ऋण राशि पर ईएमआई का भुगतान करना होता है जब तक खरीदारों को घर मुहैया न करा दिया जाए। लेकिन, आरोप है कि डेवलपर्स ने घर मुहैया नहीं कराए और खरीदारों पर ईएमआई का बोझ पड़ने लगा। घर पर कब्जा न होने के बावजूद बैंक द्वारा खरीदारों को ईएमआई भुगतान के लिए मजबूर किया जा रहा है।
देश भर में इसी तरह के अन्य मामले भी दर्ज किए गए थे। इन मामलों में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने बगैर कस्टोडियल इंटेरोगेशन के चार्जशीट दाखिल करने पर सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि कस्टोडियल इंटेरोगेशन के बगैर आप यानी सीबीआई चार्जशीट कैसे दाखिल कर सकते हैं? बेंच ने कहा, “यह अदालत जांच के निष्कर्ष के लिए अनिश्चित काल तक प्रतीक्षा नहीं कर सकती.” कोर्ट ने आगे कहा कि “जांच में देरी या उसे लंबा खींचने से केवल उन घर खरीदारों की परेशानी बढ़ेगी जो पहले से ही बिल्डरों और डेवलपर्स द्वारा प्रताड़ित हैं, जिन्होंने स्पष्ट रूप से वित्तीय संस्थानों और बैंकों के साथ मिलीभगत और साठगांठ की है। बैंक अधिकारियों की जांच नहीं किए जाने पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए पीठ ने सीबीआई के एक जिम्मेदार अधिकारी से सुनवाई की अगली तारीख तक जांच की प्रगति का हलफनामा दाखिल करने को भी कहा।
मथुरा रियल एस्टेट क्षेत्र में ये मामला शुरूआत से ही चर्चा का विषय बना हुआ था। डेवलपर्स और खरीदारों के बीच इस तरह के विवाद मथुरा में भी होते रहे हैं। लेकिन, डेवलपर्स से चांदी के जूते खाकर संबंधित विभागों के अधिकारी डेवलपर्स के इशारों पर नाच कर इन मामलों को रददी की टोकरी में फेंक देते हैं। सुप्रीम कोर्ट के तेवर की जानकारी मिलते ही रियल एस्टेट क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी हैं।
मेरी बात
मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार पत्र समूह से सेवानिवृत्त होने तक के पत्रकारिता के सफर के दौरान कई पड़ाव पार किए, कई पायदान चढ़े। समाज के विभिन्न वर्गों की रिपोर्टिंग की। सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं से भरे पहलू मेरी पत्रकारिता के प्रमुख आधार रहे। संप्रति में दैनिक भास्कर समूह से जुड़कर अपनी पत्रकारिता के नए दौर में प्रवेश रखा है। अब कुछ अलग करके दिखाने की तमन्ना है। हमारे आसपास ही तमाम ऐसे कार्यकलाप होते हैं जो जनहित और समाजहित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, निभा सकते हैं लेकिन स्पष्ट कहूं तो कूपमंडूकता के कारण हम यहां तक पहुंच नहीं पाते, जान नहीं पाते। हम ऐसे ही अदृश्य व्यक्तित्व और कृतत्व को आपके सामने लाने का प्रयास करेंगे।
जय हिंद















