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अरे! किससे जीतेगो? किसे हराओगे?, ताज प्रेस क्लब की ये तासीर तो कभी न रही

-1989 में तीन पत्रकारों ने संजोया था प्रेस क्लब का सपना, फिर सहयोग, समन्वय और सहभागिता से रखी थी ताज प्रेस क्लब की नींव -रोज सुबह खुद लगाते थे झाड़ू, बाल्टी से पानी भरकर लाते थे पीने के लिए, पत्रकार वार्ता के लिए बिछाते थे फर्श -तब पद की नहीं होती थी…

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