- नवजातों को रोटावायरस वैक्सीन बचाती है उल्टी-दस्त जैसी गंभीर बीमारी से, महीनों से नहीं है वैक्सीन
- बार-बार तारीख पर तारीख दी जाती है नवजात के परिजनों को, महीनों से चल रहा गुमराह करने का सिलसिला
राजेश मिश्रा, आगरा: सुविधाओं के नजरिये से सरकार पूरी तरह से स्वस्थ है लेकिन आगरा का सरकारी तंत्र बीमारी का बहाना बनाकर धोखा दे रहा है। वो भी अबोध की सेहत के साथ खिलवाड़ करके। ऐसा अबोध जिसने इस दुनिया में चंद रोज पहले ही कदम रखा है। अबोध यानी नवजात को विभिन्न गंभीर बीमारियों से ताजिंदगी बचाने के लिए नियमित टीकाकरण का सरकारी प्रक्रम चलता रहा है। वर्षों से। मगर, आगरा में बहुत बड़ा धोखा किया जा रहा है। उल्टी-दस्त जैसी तकलीफ से बचाने को नवजात को जो वैक्सीन लगनी चाहिए, सरकारी अस्पतालों में वो वैक्सीन है ही नहीं। स्वास्थ्य केंद्र आने वाले नवजात के परिजनों को तारीख पर तारीख दी जा रही है। जबकि, इस सवाल पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अरुण श्रीवास्तव एक गैरजिम्मेदाराना बात कहते हैं कि आरवी (डायरिया का बचाव) तो बंद हो चुकी है, आप चाहें तो पेंटावैलेंट (डिप्टीथीरिया आदि का बचाव) लगवा सकते हैं।
नियमित टीकाकरण के तहत नवजात को जन्म के बाद ओपीवी, हेप बी, बीसीजी का टीका लगता है।डेढ़ माह बाद अगला टीकाकरण होता है इसमें ओपीवी, पेंटा, रोटा, एफआइपीवी वैक्सीनेशन होता है। मैं अपने नवजात पौत्र को लेकर बिचपुरी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गया था। जन्म के डेढ़ माह बाद के टीकाकरण के दौरान 11 फरवरी 26 को आरवी ये कहकर नहीं लगाई थी कि अभी ये वैक्सीन आई नहीं है। पता करते रहना, जब आ जाएगी तो लग जाएगी। ढाई माह बाद के टीकाकरण शैडयूल पर यहां पर पहुंचा तो ओपीवी और पेंटा वैक्सीन तो लगा दी लेकिन, आरवी फिर नहीं लगाई। वही जवाब, अभी वैक्सीन आई नहीं है। पता करते रहना। हम अपने पौत्र को लेकर लौट आए।
बाल रोग विशेषज्ञों से आरवी की बाबत चर्चा की तो बताया गया कि ये वैक्सीन अन्य की तरह ही नवजात की सेहत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आरवी के दो शैडयूल मिस होने पर हमने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अरुण श्रीवास्तव से गुरुवार शाम को फोन पर संपर्क किया। सीएमओ ने जो बताया, उसे सुनकर दंग रह गया। सवाल था आरवी की अनुलब्धता का, वो कह रहे थे कि पेंटा लगवा लो। आरवी कब आएगी, पता नहीं। तब तक जिले भर के हजारों नवजात क्या गेस्ट्रो की बीमारी के खतरे में खेलें? क्या शासन को इस बाबत पत्राचार किया? सीएमओ से फोन पर ये हुई बातचीत
सीएमओ साहब नमस्कार, मैं फलां बोल रहा हूं। सीएचसी बिचपुरी पर आरवी नहीं है, मेरे पौत्र जैसे कई नवजात को तारीख पर तारीख दी जा रही है महीनों से?
सीएमओ का जवाब: हां, आरवी की सप्लाई बंद हो चुकी है। जब नियमित टीकाकरण शुरू हुआ था, तब आई थी। अब नहीं है। आप जानते ही हो कि सरकारी व्यवस्था के बारे में। अब आरवी की सप्लाई ही नहीं है।
सर, हमें तो कहा जा रहा है कि पता करते रहना? जब आ जाएगी तब लगवा देना। वहां पर तो मना भी नहीं किया? तो ऐसे में हम क्या करें? क्या इसका कोई सबस्टीटयूट है?
सीएमओ का जवाब: आप पैंटावैलेंट क्यों नहीं लगवा लेते? पता नहीं आपने लगवाया या नहीं? पैंटावैलेंट वैक्सीन तो वहां पर जरूर होगी।
सर, क्या आरवी का विकल्प है पेंटावैलेंट?
सीएमओ का जवाब: विकल्प तो नहीं है लेकिन, आप लगवा सकते हैं।
सर, जब आरवी का विकल्प नहीं है तो पेंटावैलेंट से क्या मतलब?
सीएमओ का जवाब: अच्छा मैं पता करता हूं।और आपको अभी फोन पर अवगत भी करा दिया जाएगा।
आरवी एक प्रमुख दवा है नवजात के लिए
बाल रोग विशेषज्ञ डा. शरद गुप्ता कहते हैं कि रोटा वायरस वैक्सीन शिशु को रोटा वायरस संक्रमण से बचाने के लिए एक प्रमुख खुराक है। इसे जन्म के नियमित अंतराल में अवश्य दिया जाना जरूरी है। यानी जन्म के 6 से 24 सप्ताह के बीच में शिशु को दो से तीन खुराक में दिया जाना चाहिए। ये वैक्सीन शिशु को उल्टी दस्त और निर्जलीकरण जैसी परेशानी से बचाता है। जबकि पेंटावैलेंट वैक्सीन शिशु को डिप्थीरिया, टिटनेस, काली खांसी, हेपेटाइटिस बी और हीमोफिलस इंन्फलुएंजा टाइप बी से बचाता है। ये वैक्सीन शिशु को 6, 10 और 14 सप्ताह की उम्र में दी जाती है।
कहीं बाजार से दुरभि संधि तो नहीं
जनस्वास्थ्य के प्रति सरकार सजग, सचेत और सक्रिय है। नियमित टीकाकरण राज्य और केंद्र सरकार की ओर से चलाए जाते हैं। ऐसा कतई संभव नहीं है कि किसी भी तरह की वैक्सीन की उपलब्धता सरकार द्वारा न कराई जाती हो। सरकारी अस्पताल में ये वैक्सीन मुफ्त में उपलब्ध कराने का प्रविधान है जबकि बाजार में यही टीकाकरण कई हजार रुपये में होता है। आश्चर्य इस बात का है कि सरकारी अस्पतालों में आरवी का अभाव है जबकि बाजार में भरपूर है। आशंका है कि सरकारी अस्पतालों में जरूरी वैक्सीन की कमी के पीछे कहीं बाजार से दुरभि संधि तो नहीं है।
मेरी बात
मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार पत्र समूह से सेवानिवृत्त होने तक के पत्रकारिता के सफर के दौरान कई पड़ाव पार किए, कई पायदान चढ़े। समाज के विभिन्न वर्गों की रिपोर्टिंग की। सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं से भरे पहलू मेरी पत्रकारिता के प्रमुख आधार रहे। संप्रति में दैनिक भास्कर समूह से जुड़कर अपनी पत्रकारिता के नए दौर में प्रवेश रखा है। अब कुछ अलग करके दिखाने की तमन्ना है। हमारे आसपास ही तमाम ऐसे कार्यकलाप होते हैं जो जनहित और समाजहित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, निभा सकते हैं लेकिन स्पष्ट कहूं तो कूपमंडूकता के कारण हम यहां तक पहुंच नहीं पाते, जान नहीं पाते। हम ऐसे ही अदृश्य व्यक्तित्व और कृतत्व को आपके सामने लाने का प्रयास करेंगे।
जय हिंद









