ये हैं रामनाथ वर्मा जी। उम्र होगी करीब 60 वर्ष। इस आयु में जब लोग पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुक्त होकर घूमने-फिरने, घर पर आराम करते हैँ, रामनाथ जी तब आगरा कलेक्ट्रेट में कंप्यूटर पर एफिडेविट बनाने में जुटे रहते हैं। कलेक्ट्रेट, एफिडेविट, ये कोई नई बात नहीं है। नयापन तो ये है कि टाइपराइटर पर टक-टक की आवाज गूंजने वाले कलेक्ट्रेट में अब ये शोर थम चुका है। अधिकतर लेखक कम्प्यूटर पर काम करने लगे हैं। ये बदले समय की जरूरत भी थी। होती भी क्यों ना। अब किसी के पास समय नहीं है। जो भी यहां आता है, तत्काल काम कराने की मंशा रखता है। रामनाथ बताते हैं कि वे 1998 से यहां लेखक और स्टांप वेंडर हैं। टाइपराइटर ही प्रयोग करते रहे हैं। एक साल पहले ही कम्प्यूटर पर काम करना शुरू किया है। इस उम्र में भी कम्प्यूटर सीख गए, कम्प्यूटर पर टाइप करने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई, वे बताते हैं कि टाइपराइटर की तरह ही इसका कीबोर्ड है, इसलिए परेशानी नहीं हुई। तब और अब में क्या फर्क महसूस करते हैं, रामनाथ ने बताया कि टाइपराइटर पर अंगुलियां टाइप करते-करते थक जाती थीं, कम्प्यूटर पर ऐसा नहीं है। कम्प्यूटर पर काम करने के कई फायदे भी हैं। जैसे– टाइपिंग जल्दी हो जाती है, लिखावट स्पष्ट होती है, कोई संशोधन करना होता है तो कर लेते हैं। टाइपराइटर में संशोधन में दिक्कत होती थी, या तो सफेदा लगाकर उसी स्थान पर फिर लिखना पड़ता था। कभी-कभी तो ये भी संभव नहीं होता था। ऐसे स्टांप बेकार हो जाता था। स्टांप पेपर की कीमत जेब से भुगतनी पडती थी। अब ई स्टांप का दौर है। ऐसे में कम्प्यूटर बहुत काम आ रहा है। अब तो आराम कर लो, पूरी जिंदगी लगा दी यहां टाइप करते-करते? रामनाथ ने कहा कि जब तक सांस है, काम करते रहना है। इससे एक्टिविटी बनी रहती है। वैसे, परिवार भरा-पूरा है। पांच बेटे हैं। बडा बेटा कलेक्ट्रेट में ही उनकी तरह लेखक है। एक बेटा प्राइवेट जाॅब कर रहा है। दो बेटे अपना-अपना व्यवसाय कर रहे हैं। सबसे छोटा उनके साथ ही काम सीख रहा है। बात करते-करते रामनाथ फिर कम्प्यूटर पर अंगुलियां थिरकने लगे, बोले- जल्दी काम करके देना है।
मेरी बात
मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार पत्र समूह से सेवानिवृत्त होने तक के पत्रकारिता के सफर के दौरान कई पड़ाव पार किए, कई पायदान चढ़े। समाज के विभिन्न वर्गों की रिपोर्टिंग की। सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं से भरे पहलू मेरी पत्रकारिता के प्रमुख आधार रहे। संप्रति में दैनिक भास्कर समूह से जुड़कर अपनी पत्रकारिता के नए दौर में प्रवेश रखा है। अब कुछ अलग करके दिखाने की तमन्ना है। हमारे आसपास ही तमाम ऐसे कार्यकलाप होते हैं जो जनहित और समाजहित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, निभा सकते हैं लेकिन स्पष्ट कहूं तो कूपमंडूकता के कारण हम यहां तक पहुंच नहीं पाते, जान नहीं पाते। हम ऐसे ही अदृश्य व्यक्तित्व और कृतत्व को आपके सामने लाने का प्रयास करेंगे।
जय हिंद















