राजेश मिश्रा, आगरा: शुक्रवार रात करीब साढे दस बजे की बात है। मैं मथुरा से आगरा के लिए लौट रहा था। कार में सीएनजी भरवाने के लिए रिफायनरी के पास स्थित टोरेंट गैस पंप पर पहुंचा। कार में गैस भरने के बाद मशीन की स्क्रीन देखी तो मूल्य वाले कालम में 606.69 का आंकड़ा आया। यानी, 606.69 रुपये की कीमत की गैस भरी गई। हमें भुगतान भी 606.69 रुपये का करना था। चूंकि नगद में 69 पैसे कहां से आएंगे, या फिर, खुले पैसे पंप वाले भी कहां से देंगे। ऐसे में हमने आनलाइन पेमेंट किया। हमसे कहा गया कि 607 रुपये की गैस भरी है, इतना भुगतान करना है। हमने जब 606.69 की कीमत का जिक्र किया तो काउंटर वाले ने कहा कि 607 रुपये ही देने पड़ेंगे। खैर, हमने 607 रुपये का पेमेंट आनलाइन कर दिया।



ये केवल हमारे साथ ही नहीं हुआ। पहली बार भी नहीं हुआ। हम अक्सर इसी पंप से सीएनजी भरवाते हैं। हर बार पूरे आंकडे में ही पेमेंट लिया गया। हमें देना पड़ा। आम ग्राहक इस बात पर ज्यादा गौर भी नहीं करता। दस-बीस पैसे के लिए कौन सिर मारे। लेकिन, न केवल हर ग्राहक को गुमराह किया जाता है बल्कि, दिन भर में ग्राहकों की संख्या के आधार पर देखा जाए तो हर रोज यहां पर ऐसे ही अच्छी-खासी अतिरिक्त कमाई की जाती है। इस पंप पर पूछने पर कहा कि रोज कितने वाहन यहां आते हैं, इसका आंकड़ा तो नहीं है लेकिन, औसतन हर रोज पांच से आठ हजार किलो सीएनजी की खपत होती है। अब आप इससे ग्राहकों से हो रही वसूली का अंदाज लगा सकते हैं। जबकि आनलाइन प्रक्रिया में तो एक-एक पैसे के पेमेंट की सुविधा है।
अब पेमेंट की रसीद का खेल देखिए।
इस रसीद में तारीख, समय, इन्वायस नंबर, बीआर नंबर, आदि विवरण तो है लेकिन, कितनी सीएनजी की सप्लाई की गई,ऐसा कोई आंकडा नहीं होता। हां, एक बाक्स में ग्राहक की ओर से खुद ही प्रिंट हो जाता है कि मैं यहां की सर्विस से संतुष्ट हूं, और पेमेंट के लिए सहमत हूं। सभी रसीदें ऐसी ही होती हैं।
सीएनजी पंप पर ग्राहकों के साथ इस तरह की वसूली दूसरे पंप भी होती है। सिकंदरा स्थित पंप पर भी इसी तरह से भुगतान लिया जाता है।
कुछ तो गड़बड़ है
रसीद में दर्ज आंकड़े और अतिरिक्त भुगतान के बारे में बात करें तो एक बात समझ में आती है। इसमें कर्मचारी की तो मिलीभगत हो नहीं सकती। आनलाइन पेमेंट तो सीधे कंपनी के खाते में जाता है। रसीद में सीएनजी का वजन भी नहीं लिखा होता। कितनी गैस बिकी और कितना भुगतान हुआ, ये तो शाम को कंपनी स्तर से ही होता है। तो फिर, ये अतिरिक्त भुगतान आखिर कहां जा रहा है, कौन लाभ ले रहा है?
मेरी बात
मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार पत्र समूह से सेवानिवृत्त होने तक के पत्रकारिता के सफर के दौरान कई पड़ाव पार किए, कई पायदान चढ़े। समाज के विभिन्न वर्गों की रिपोर्टिंग की। सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं से भरे पहलू मेरी पत्रकारिता के प्रमुख आधार रहे। संप्रति में दैनिक भास्कर समूह से जुड़कर अपनी पत्रकारिता के नए दौर में प्रवेश रखा है। अब कुछ अलग करके दिखाने की तमन्ना है। हमारे आसपास ही तमाम ऐसे कार्यकलाप होते हैं जो जनहित और समाजहित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, निभा सकते हैं लेकिन स्पष्ट कहूं तो कूपमंडूकता के कारण हम यहां तक पहुंच नहीं पाते, जान नहीं पाते। हम ऐसे ही अदृश्य व्यक्तित्व और कृतत्व को आपके सामने लाने का प्रयास करेंगे।
जय हिंद















