-सांसद राजकुमार ने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से कराई भदावर राजघराने की राजकुमारी मधुलिका सिंह की मुलाकात
- इस मुलाकात को लेकर सोशल मीडिया पर राजनीतिक कमेंट्स की लगी होड़
- सांसद चाहर और भदावर नरेश अरिदमन सिंह के मनभेद और मतभेद लोकसभा चुनाव में आ चुके हैं सामने
राजेश मिश्रा, आगरा: फतेहपुर सीकरी से सांसद राजकुमार चाहर की फेसबुक वाल पर शनिवार यानी 21 फरवरी को दो फोटो सहित एक सूचना पोस्ट हई। एक फोटो में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को बुके देते हुए सांसद चाहर और दो महिलाएं हैं। इनमें एक महिला भदावर राजघराने की राजकुमारी मधुलिका सिंह और दूसरी उनकी बेटी पूर्णामृता हैं। पोस्ट में इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया। दूसरी फोटो में ये सभी लोग सोफा पर बैठकर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। कहने को तो ये शिष्टाचार भेंट ही थी लेकिन, इसके बाद सोशल मीडिया पर कमेंट्स की जो होड़ लगी, उसने इस पोस्ट को बाह के सियासी क्षेत्र में चर्चा और अटकलों का हॉट टॉपिक बना दिया। दिल्ली में मिलने और मिलाने के इस ‘संगम’ से चंबल में अटकलों की लहरें उठने लगीं हैं।
चूंकि ये पोस्ट सांसद चाहर की फेसबुक वाल पर है, ऐसे में इक्का-दुक्का को छोड़कर सभी मैसेज में सांसद जी की जय-जयकार की गई। हां, भगत सिंह चौहान का कमेंट अलग था। इसमें लिखा है- एक बार सांसद बाबूलाल जी ने भी यही कोशिश की थी, बाह के लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की थी, लेकिन बाह की जनता की आस्था भदाबर हाउस में है और रहेगी। इसलिए झूठे फोटो दिखाकर जनता में भ्रम पैदा न करें। होगा वही जो बाह बटेश्वर नाथ करेंगे। इसी तरह, ठाकुर लक्ष्मण परमार ने कमेंट किया-राजकुमार चाहर जी, आप दो बार सांसद चुने मगर हमारे क्षेत्र के लिए कुछ योजनाओं को लाया जाए। हमें अपने क्षेत्र का विकास दे दो, हम भीख नहीं मांग रहे हैं। इन्होंने कई सवाल भी उठाए हैं। मोहन प्रकाश लवानिया ने भी विकास की बात की है। (हालांकि रविवार को सांसद चाहर की फेसबुक वाल पर ये पोस्ट नजर नहीं आई)।
ऐसी क्या मजबूरी हो गई सांसद जी ?
कमेंट्स करने वालों में मुनि बरुआ ने सबसे अलग हटकर लिखा -सांसद जी, ऐसी क्या मजबूरी हो गई जो आपको ये (राजकुमारी की राजनाथ सिंह से शिष्टाचार भेंट कराना) करना पड गया….। बाह क्षेत्र में चर्चा और अटकलें भी यही हैं कि आखिर, इस मुलाकात की मजबूरी क्या थी? इतना जरूरी भी क्या था? पहले बात करते हैं राजकुमारी मधुलिका सिंह की। वे पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह की बहन हैं और दिल्ली में अपनी बेटी पूर्णामृता के साथ रहती हैं। चर्चा के मुताबिक, भदावर हाउस से उनकी कुछ अनबन चल रही है। इसके कारण क्या हैं, ये अंदर की बात है। हां, इतना जरूर है कि बाह क्षेत्र में वे कभी-कभार ही आई हैं। इस दौरान उनकी हिफाजत का विशेष ध्यान रखा जाता रहा है। कहा तो यह भी जाता है कि मथुरा तक उनकी सुरक्षा रखी जाती थी।
अरिदमन सिंह से मनमुटाव
सांसद राजकुमार चाहर और पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह का सियासी मनमुटाव सर्वविदित है। लोकसभा चुनाव में प्रचार मंच पर केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में अरिदमन सिंह की सांसद चाहर पर उनकी सक्रियता को लेकर टिप्पणी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण बन गया था। इसके बाद संगठन का कार्यक्रम हो या सत्ता का, सांसद चाहर और अरिदमन सिंह को कभी एक मंच पर नहीं देखा गया। बाह क्षेत्र में शनिवार से ही सर्वाधिक चर्चा का विषय ही सांसद चाहर की फेसबुक पोस्ट बनी हुई है कि सांसद चाहर का राजकुमारी मधुलिका सिंह की राजनाथ सिंह से मुलाकात कराने का मकसद क्या था? क्षेत्रीय लोग तो कह रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान जो कुछ हुआ, सांसद चाहर कछुआ चाल से उसका बदला ले रहे हैं। कैसा बदला? जवाब देते हैं कि चुनावी मैदान में उतरवा कर। मधुलिका सिंह ने भी राजनाथ सिंह से मुलाकात के लिए ये जरिया क्यों चुना? ये भी लोगों के सवालों के घेरे में है। अगर आगामी विधानसभा चुनाव पर माइंटसेट है तो सांसद चाहर के फेसबुक अकाउंट पर इसी पोस्ट पर एक यूजर कमेंट करते हैं – सांसद जी, किस-किस से टिकट का वादा करोगे?
तीर तो अभी और भी हैं तरकश में
सत्ता का कामकाज और संगठनात्मक कार्यक्रम ही राजनीति नहीं है, राजनीति तो हर रोज, हर मौके पर होती है। बाह के सियासी क्षेत्र में भी राजनीति का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। तगड़ी प्रतिस्पर्धा हो रही है। महीनों से। कभी सोशल मीडिया पर रील बनाकर तो कभी शतरंजी बिसात पर मोहरे बिछाकर। रील में कोई कहता है-हम दबाव में काम नहीं करते, व्यवहार अलग बात है। तो कोई कहता है-दबदबा था, दबदबा है, दबदबा बना रहेगा…। रील में नजर आ रही रीयल्टी और इसके पार्श्व में गूंज रहे फिल्मी या लोकगीत के जरिए तरह-तरह के संदेश दिए जा रहे हैं। सीधे-सीधे और सपाट। राजनीति की बिसात भी हलचल में है। पिछले लोकसभा चुनाव में अचानक राजनीति के रनवे पर टेकआफ करने आए एक पूर्व सैन्य अधिकारी को तब दिल्ली के लिए क्लीयरेंस नहीं मिल पाया लेकिन, ख्वाहिश की मिसाइल का मुंह अब लखनऊ की ओर मोड़ लिया है। सांसद जनचौपाल हो या अन्य कोई कार्यक्रम, उनके गृह सदस्य की मौजूदगी भी यूं ही नहीं रहती है। देखना ये है कि विधानसभा का आगामी चुनाव होने तक चंबल में किस-किस तरह की लहरें उठेंगी। चंबल की अथाह गहराई है और गहरे पानी में लहरें कभी-कभार ही उठती हैं। जब बयार की शह मिलती है तभी। बाह क्षेत्र में किसकी सियासी जड़ें होगीं गहरी और किसको मिलती है पावरफुल बयार की शह, ये समय ही बताएगा।
मेरी बात
मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार पत्र समूह से सेवानिवृत्त होने तक के पत्रकारिता के सफर के दौरान कई पड़ाव पार किए, कई पायदान चढ़े। समाज के विभिन्न वर्गों की रिपोर्टिंग की। सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं से भरे पहलू मेरी पत्रकारिता के प्रमुख आधार रहे। संप्रति में दैनिक भास्कर समूह से जुड़कर अपनी पत्रकारिता के नए दौर में प्रवेश रखा है। अब कुछ अलग करके दिखाने की तमन्ना है। हमारे आसपास ही तमाम ऐसे कार्यकलाप होते हैं जो जनहित और समाजहित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, निभा सकते हैं लेकिन स्पष्ट कहूं तो कूपमंडूकता के कारण हम यहां तक पहुंच नहीं पाते, जान नहीं पाते। हम ऐसे ही अदृश्य व्यक्तित्व और कृतत्व को आपके सामने लाने का प्रयास करेंगे।
जय हिंद













