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अनुमानित पांच हजार करोड़ टर्न ओवर है आगरा के दवा कारोबार का

-साढ़े छह सौ से ज्यादा मेडिकल रिप्रेजेंटिटव्स कार्यरत हैं आगरा में

-साढ़े तीन सौ ज्यादा कंपनियों का सीधा कनेक्शन है आगरा से

-करीब साढ़े छह सौ हैं थोक लाइसेंस, छह हजार से ज्यादा रिेटेल लाइसेंस

-औसतन हर रोज 40 करोड़ का है आगरा में रिेटेल कारोबार

राजेश मिश्रा, आगरा: चंद धंधेखोरों के ठिकानों से ही करीब पांच सौ करोड़ की कीमत की संदिग्ध दवाएं जब्त, रिश्वत के लिए एक करोड़ नकद। ये आंकड़ा आम लोगों को चौंका जरूर रहा होगा लेकिन, बाजार को कतई नहीं। इसलिए कि आगरा का दवा बाजार ही इतना व्यापक है कि ये आंकड़ा ऊंट के मुंह में जीरा जितना है। आगरा के दवा बाजार में अवैध धंधे की जड़ें इतनी गहरी और फैली हुई हैं कि इन्हें खंगालना इतना आसान नहीं है जितना ही सिस्टम समझ रहा है।

 जानकार बताते हैं कि आगरा में करीब साढ़े छह सौ मेडिकल रिप्रेजेंटिटव्स हैं।ये आंकड़ा बढ़ भी सकता है। अगर एक कंपनी के दो-दो मेडिकल रिप्रेजेंटिटव्स को आधार मान लिया जाए तो कंपनियों की संख्या पहुंचती है साढ़े तीन सौ से ज्यादा। यानी, इतनी कंपनियां सीधे-सीधे आगरा में कारोबार कर रही हैं। अनुमानित साढ़े छह सौ थोक लाइसेंस और छह हजार से ज्यादा रिेटेल लाइसेंस के आधार पर टर्न ओवर का अनुमान लगाया जाए तो ये आंकड़ा तकरीबन पांच हजार करोड़ तक पहुंचता है। इनमें से अकेले रिटेल में हर रोज औसतन 40 से 50 करोड़ का कारोबार होता है।  इतने व्यापक बाजार में नकली दवाओं का धंधा कोई बड़ा कठिन कार्य नहीं है। इसलिए, मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों के हौसले निरंतर बुलंद होते रहे हैं।

ज्यादातर ठिकाने पड़ोसी राज्यों की सीमा पर

भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो आगरा की पड़ोसी राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड़ और पंजाब से बहुत नजदीकी है। नकली दवा के रैकेट के पर्दाफाश का ताजा मामला हो या फिर विगत में की गई छापामारी के, ज्यादातर में किसी न किसी पडा़ेसी राज्य के सीमावर्ती शहर का ही नाम आया है। जानकार बताते हैं कि दूसरे राज्य में कार्रवाई करना जिलास्तरीय किसी अधिकारी के लिए असंभव नहीं तो मुश्किल जरूर है। इसी का फायदा धंधेखोर उठाते हैं।

बहु राष्ट्रीय कंपनियां नहीं पड़ती पचड़े में

अवैध दवा के धंधेखोर बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी चपत लगाते रहे हैं। इन कंपनियों की सेल भी प्रभावित होती है। लेकिन, इनका कारोबार व्यापक है और इसलिए ये कंपनियां किसी तरह की शिकायत आदि के पचड़े में नहीं पड़ती। धंधेखोर कंपनियों की इसी बेफिक्री का फायदा उठाती हैं।

जीवनरक्षक दवाओं पर जीएसटी शून्य, रिटेल केमिस्ट एसोसियेशन ने किया स्वागत

केंद्र सरकार ने बुधवार को 33 जीवनरक्षक दवाओं को जीएसटी से शून्य घोषित किया है। आगरा में रिेटेल केमिस्ट एसोसियेशन के अध्यक्ष डा. आशीष ब्रहमभटट, संस्थापक श्याम तिवारी, महामंत्री राजीव शर्मा, कोषाध्यक्ष सतीश पाठक, वीरू भाई ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। कहा है कि जीवनरक्षक दवाओं पर जीएसटी शून्य घोषित होने से रोगियों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि दवाएं सस्ती होंगी। इससे कंपनियों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट की लागत समाप्त होगी और उत्पादकता बढ़ेगी।

मेरी बात मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार…

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