– भादों मास की पूर्णिमा पर ही मडोई गांव में होता है ये महारास
-इसी दिन राधा और कृष्ण के स्वरूप धारण करते हैं ये विशेष आभूषण
– किसी गोपनीय स्थान से पुलिस पिकेट के साए में एक दिन पहले लाए जाते हैं आभूषण
-मंदिर में पूजा-अर्चना और महारास के बाद फिर गोपनीय स्थान पर पहुंचाए जाते हैं पुलिस सुरक्षा में
राजेश मिश्रा, आगरा: भादों मास की पूर्णिमा यानी इसी रविवार को बरसाना क्षेत्र के मडोई गांव में परंपरागत महारास का आयोजन हुआ। इसमें राधा के स्वरूप ने रत्न जडित चंद्रिका और कृष्ण के स्वरूप ने रत्न जडित मुकुट धारण किया। ये चंद्रिता और मुकुट जितने आकर्षण का केंद्र रहे, इनकी कहानी भी उतनी ही कौतूहल वाली रही। ये आभूषण पुलिस सुरक्षा में एक दिन पहले शाम को मंदिर पर लाए गए और महारास के बाद पुलिस सुरक्षा में उसी गोपनीय स्थान पर पहुंचा दिए गए। । इनकी सुरक्षा की स्थिति ये थी कि स्थानीय स्तर की पुलिस भी भारी मात्रा में मुस्तैद रही।


आराध्य के रत्न जडित इन आभूषणों की इतनी सुरक्षा के पीछे तरह-तरह की चर्चाएं हैं। दरअसल, ये आभूषण मध्य प्रदेश के दतिया के राजा भवानी सिंह ने पुरस्कार स्वरूप भेंट किए थे। चर्चा है कि उस दौरान डकैतों ने इन आभूषणों को लूटने का दो बार प्रयास किया लेकिन, डकैतों के मंसूबे पूरे नहीं हुए। इसके बाद ही इन आभूषणों को किसी गोपनीय स्थान पर पुलिस सुरक्षा में रखने की व्यवस्था बनाई गई।
महारास की धूम संपूर्ण विश्व में दिखाई दे रही है। वैदिक काल में योगेश्वर श्रीकृष्ण द्वारा किए गए महारास को धरोहर के रूप में ब्रज के ब्राह्मणों ने जीवंत कर दिया। पौराणिक महत्व के इस आकर्षण को बरसाना के मडोई गांव ने नवीन जीवन दिया है। यहां रासलीलाओं का प्राकट्य स्वामी घमण्डदेवाचार्य महाराज द्वारा किया गया। इसके बाद छाता तहसील के ब्राह्मण समाज के प्रतिष्ठित पंडित रामबाबू (अब दिवंगत) व उनके सुपुत्र वरिष्ठ अधिवक्ता नंद किशोर उपमन्यु के पूर्वज स्वामी उदयकरण एवं स्वामी खेमकरण ने रासलीलाओं को नवीन सोपानों तक पहुंचाया।

बताते हैं दतिया राजघराने की मांग पर श्री उपमन्यु के पूर्वजों ने नागनाथ लीला का मंचन किया था और कुछ आयुर्वेदिक औषधियों के चमत्कार भी दिखाए थे। राजा के वैद्य इस विधा में असफल रहे थे। इस चुनौतीपूर्ण कार्य के लिए दतिया के राजा भवानी सिंह (1857-1907) अति प्रसन्न हुए। श्री उपमन्यु के पूर्वज को देश दीवान घोषित कर दिया और श्रीकृष्ण के लिए रत्न जड़ित मुकुट और श्री राधा रानी के लिए रत्न जड़ित चंद्रिका भेंट की। उपमन्यु परिवार इन्हें योगेश्वर ही मानकर पूजन करता चला आ रहा है। श्री उपमन्यु ने बताया कि रत्न जड़ित मुकुट एवं चंद्रिका पूरे वर्ष वह किसी गोपनीय अज्ञात स्थान पर रहते हैं। वर्ष में एक दिन भादों की पूर्णिमा के लिए पुलिस बल के साथ इन्हें लेकर मडोई गांव स्थित महारास स्थल पर पहुंचते हैं। इस पूर्णिमा पर पूजन-अर्चन के लिए एक दिन पहले ही चंद्रिका और मुकुट पुलिस सुरक्षा में लाए गए। आयोजन के बाद उसी प्रक्रिया के तहत किसी गोपनीय स्थान पर पहुंचा दिए गए।
मेरी बात
मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार पत्र समूह से सेवानिवृत्त होने तक के पत्रकारिता के सफर के दौरान कई पड़ाव पार किए, कई पायदान चढ़े। समाज के विभिन्न वर्गों की रिपोर्टिंग की। सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं से भरे पहलू मेरी पत्रकारिता के प्रमुख आधार रहे। संप्रति में दैनिक भास्कर समूह से जुड़कर अपनी पत्रकारिता के नए दौर में प्रवेश रखा है। अब कुछ अलग करके दिखाने की तमन्ना है। हमारे आसपास ही तमाम ऐसे कार्यकलाप होते हैं जो जनहित और समाजहित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, निभा सकते हैं लेकिन स्पष्ट कहूं तो कूपमंडूकता के कारण हम यहां तक पहुंच नहीं पाते, जान नहीं पाते। हम ऐसे ही अदृश्य व्यक्तित्व और कृतत्व को आपके सामने लाने का प्रयास करेंगे।
जय हिंद














