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आगरा में बिचपुरी कृषि फॉर्म में 15 अगस्त 1947 को रोपे गए पौधे का नाम रखा था स्वतंत्रता

रमेश राय, आगरा: गुलामी की त्रासदी को भुलाने के साथ ही आजादी के पल को यादगार बनाने के लिए आरबीएस शिक्षण संस्थान के बिचपुरी कृषि फार्म पर 15 अगस्त 1947 को वट का एक पौधा रोपा गया था। इसका नाम रखा गया था स्वतंत्रता। आज ये पौधा एक विशालकाय वट वृक्ष का रूप ले चुका है। पौधे से लेकर वृक्ष बनने तक के 79 वर्षों के सफर की दास्तां भी राष्ट्रभक्ति से सराबोर प्रेरणादायी है।

 इस 15 अगस्त को जब चहुंओर आजादी का जश्न मनाया जा रहा था। शान से तिरंगा फहराया जा रहा था। देशभक्ति के तराने गूंज रहे थे, तब बिचपुरी स्थित आरबीएस शिक्षण संस्थान के कृषि महाविद्यालय परिसर स्थित एक वट वृक्ष को सजाया-संवारा जा रहा था। इस वृक्ष की नाम पटि्टका अपना परिचय खुद दे रही थी। इस पर लिखा था-स्वतंत्रता वट वृक्ष। विशालकाय क्षेत्रफल में फैले शिक्षण संस्थान के परिसर में तमाम संकाय हैं। सभी स्थानों पर झंडारोहण किया जाना था। लेकिन, सभी स्टाफ सुबह ठीक सात बजे इस वट वृक्ष के साए में एकत्रित थे। सामूहिक रूप से इस वट वृक्ष को जलहरी दी गई।यानी, इस वृक्ष को जलदान कर आजादी के वीर सपूतों को श्रद्धाजंलि अर्पित की। इसके बाद सभी संकाय सदस्यों ने अपने-अपने अनुभागों में जाकर स्वतंत्रता दिवस का आयोजन किया।  

 इस वट वृक्ष और जलहरी रीति के बारे में संस्थान के अधिकारियों ने बताया। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. राजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि 15 अगस्त 1947 को ये पौधा तत्कालीन प्रबंधन द्वारा रोपा गया था। इसका नाम ही स्वंतत्रता रखा गया था। हर वर्ष 26 जनवरी और 15अगस्त को यहां पर हम सब जलहरी करते हैं, तिरंगा फहराते हैं। संस्थान के प्रो. पी के सिंह ने बताया कि इस परिसर में संचालित सभी संस्थानों के प्रतिनिधि सबसे पहले यहां पर ही आते हैं, जलहरी करते हैं, इसके बाद ही अपने-अपने संकाय में कार्यक्रम करते हैं।आरबीएस कालेज के प्रो. लक्ष्मन सिंह ने बताया कि बाटनी के प्रोफेसर डा. आर के एस राठौर जी ने अपनी पुस्तक में कौन कौन से विशेष पेड़ कहां-कहां पर हैं, का विवरण दिया है। इस पुस्तक में इस स्वतंत्रता वट वृक्ष का उल्लेख है। इसके अनुसार ही कहा जाता है ये 15अगस्त् 1947 को रोपा गया था। ये वृक्ष हमारी स्थिरता का प्रतीक भी है।

मेरी बात मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार…

2 Comments

  1. Ramesh Rai says:

    बहुत सुन्दर आकर्षक रोचक प्रस्तुति के लिए साधुवाद🌹

  2. RameshRai says:

    🌹👍

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