Health

बुलेट एम्बोलिज्म की चमत्कारी डायग्नोज कर डा. हरि गौतम ने चौंका दिया था चिकित्सा जगत

यादों में डा. हरि गौतम

-एक मरीज के पैर में हो गया था गैंगरीन, एसएन मेडिकल कालेज में पैर काटने की थी तैयारी

-डा. गौतम के कहने पर सर्जन्स ने मरीज से पूछी हिस्ट्री, बताया कि कई वर्ष पहले सीने में मारी गई थी बंदूक की गोली

-डायग्नोसिस में पता चला कि ये गोली सरक कर आ गई थी जांघ और घुटने के बीच में, इससे ही फैला था गैंगरीन, बच गया था पैर कटने से

-एसएन में सर्जरी विभाग का विकास और विस्तार का नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया डा. गौतम ने

राजेश मिश्रा, आगरा: डा. हरि गौतम। एक प्रख्यात उच्च शिक्षाविद, एक प्रख्यात चिकित्सा शिक्षाविद, एक प्रख्यात शैक्षिक प्रशासक। शिक्षण संस्थानों के प्रमुख पदों पर आसीन की लंबी सूची। उनके व्यक्तित्व और कृतत्व की गवाही देती अवार्डों की लंबी श्रंखला। देश के शिक्षण संस्थानों में ऐसा कोई उच्च पद नहीं जिस पर वे सुशोभित नहीं हुए। ऐसा कोई पुरस्कार नहीं जो उनके नाम न हुआ हो। आगरा का एसएन मेडिकल कालेज भी उनके  

गजब शिक्षण, अजूबे प्रशिक्षण और अकल्पनीय डायग्नोसिस का साक्षी है। उन्होंने बुलेट एम्बोलिज्म की चमत्कारी डायग्नोज कर न केवल अनुभवी सर्जन्स को चौंका दिया था बल्कि एक मरीज की जिंदगी भी अपाहिज होने से बचा ली थी।

 दरअसल, हुआ कुछ ये था। एसएन मेडिकल कालेज में एक ग्रामीण युवक आया। उसके पैर में गैंगरीन हो गया था। यहां पर काफी दिनों तक उपचार हुआ मगर स्वास्थ्य लाभ नहीं हुआ। उस समय डा. मोहन सिंह, डा. जितेंद्र गोयल जैसे बेहद अनुभवी सर्जन इस केस को देख रहे थे। कोई रास्ता न देख युवक के पैर काटने का निश्चय किया गया। इसी दौरान तत्कालीन प्राचार्य डा. हरि गौतम वार्ड में आ गए। सर्जन्स ने पूरा केस बताया। काफी देर सोचविचार करने के बाद उन्होंने डाक्टरों से मरीज की हिस्ट्री जानने की सलाह दी। अपना अनुमान बताया कि हो सकता है कि शरीर में कभी कहीं गोली लगी हो। उस समय मेडिकल कालेज कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार रमेश राय बताते हैं कि दोनों सर्जन्स ने बेमन से उनकी बात पर अमल किया। मरीज से हिस्ट्री पूछी। गोली की बात कहने पर युवक ने बहुत देर याद करने के बाद बताया कि कुछ माह पहले उसके सीने में बंदूक की गोली लगी थी। तब वो साइकिल से कई किलोमीटर का सफर करके घर पहुंचा था। ये जानकारी मिलने पर डा. हरि गौतम ने उसके उस पैर से जांघ तक की स्कैन कराई। जांघ और घुटने के बीच में गोली होने की पुष्टि हो गई। इसके बाद आपरेशन करके वो गोली निकाल दी गई। कुछ दिनों बाद युवक का पैर सही हो गया।   इस चमत्कारिक डायग्नोसिस पर डाक्टरों ने जर्नल्स खंगाले। पता चला कि मिलियन में से कभी-कभार ऐसे केस मिले हैं। सर्जन्स डा. हरि गौतम की प्रतिभा के कायल हो गए थे।

जब इमरजेंसी में रेजीडेंट को मारा थप्पड़

डा. हरि गौतम अगली पीढ़ी को सिखाने में भी तत्पर रहते थे। वरिष्ठ पत्रकार रमेश राय इसका एक रोचक संस्मरण बताते हैं। बकौल रमेश राय, डा. गौतम एक दिन इमरजेंसी पहुंच गए। थर्ड ईयर का एक रेजीडेंट एक ह्रदय रोगी को हार्ट में इंजेक्शन लगा रहा था। हार्ट में इंजेक्शन लगाना जिंदगी बचाने का अंतिम चिकित्सकीय प्रयास माना जाता है। डा. गौतम ने रेजीडेंट  को इंजेक्शन लगाते देख लिया। उन्होंने सिरिंज देखी और तपाक से रेजीडेंट के गाल पर थप्पड़ृ जड़ दिया। रेजीडेंट हक्का-बक्का। डा. गौतम ने उसे बताया कि तुमने जो इंजेक्शन लगाया है उसकी सिरिंज की लंबाई इतनी नहीं है जो हार्ट को पेनीट्रेट कर सके। दवा तो वहां तक पहुंची ही नहीं। उन्होंने ज्यादा लंबाई की सिरिंज से उसी रेजीडेंट से इंजेक्शन लगवाया। मरीज की हालत में सुधार हुआ। रेजीडेंट ने डा. गौतम के पैर छुए और गलती के लिए माफी मांगी थी।

एसएन मेडिकल कालेज के सर्जरी विभाग को दिलाई विश्वस्तरीय पहचान

 डा. गौतम अपने कार्यकाल के दौरान एसएन मेडिकल कालेज की बेहतरी के लिए सतत रहे। यहां के सर्जरी विभाग के वर्तमान स्वरूप की रूपरेखा उन्होंने ही लिखी और रची थी। बर्न विभाग, प्लास्टिक सर्जरी, यूरोलॉजी,न्यूरोलॉजी  जैसी विशेषज्ञतावाली शाखाओं को उन्होंने नया जीवन दिया था। रेडियो डायग्नोसिस और रेडियो थेरेपी को अलग-अलग कराया। डा राहुल सहाय, डा. आर सी मिश्रा, डा. शेखर बाजपेयी उनकी टीम के प्रमुख सदस्य थे। मेडिकल कालेज के प्रति इतना भरोसा बढ़ गया था कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री लोकपति त्रिपाठी ने अपने पिता और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कमलापति त्रिपाठी के प्रोस्टेट का ऑपरेशन यहीं कराया था।

उत्तर भारत की पहली हार्ट सर्जरी एसएन में डा. गौतम ने ही की थी: डा. हाजरा

 एसएन मेडिकल कालेज में पूर्व मेडिसिन विभागाध्यक्ष और न्युक्लियर मेडिसन में विश्व विख्यात डा. डी के हाजरा बताते हैं कि 1970 के आसपास जब उत्तर भारत में हार्ट सर्जरी कहीं नहीं होती थी, डा. गौतम ने तब एसएन में ये सर्जरी कर एसएन का नाम रोशन किया था। डा. हाजरा बताते हैं कि 1960-61 के दौरान हरि गौतम एसएन मेडिकल कालेज आगरा से ही एमएस कर रहे थे। सेकंड ईयर के छात्र थे। मैं तब एमबीबीएस की थर्ड ईयर में था। गौतम साहब कभी-कभी हम लोगों को गाइडेंस करने आते थे। उनकी प्रतिभा और सिखाने का तरीका देख हमने उन्हें सबसे प्रभावी प्रेरणादायक मान लिया था।

मुनीश्वर, मैं रोकने नहीं, तुम्हारा साथ देने आया हूं

वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डा. मुनीश्वर गुप्ता डा. गौतम से जुड़ा एक संस्मरण सुनाते हैं। बताया कि डा. गौतम के प्राचार्य काल के दौरान एक बार जूनियर डाक्टरों के आंदोलन के दौरान पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया था। हम लोग जब पूरे जुलूस को लेकर चलना शुरू कर रहे थे उसे समय डॉक्टर गौतम ने आकर कहा- मुनीश्वर, एक दिन का समय दो हमने उनकी बात मानी। अगले दिन तक कोई परिणाम नहीं आया, तो मेडिकल कालेज में शहर भर के सरकारी और प्राइवेट चिकित्सक भी जुटे और जुलूस के रूप में चल दिए। तभी डॉक्टर गौतम आते हुए दिखाई दिए। डा. मुनीश्वर बताते हैं कि मैंने बहुत जोर से कहा, सर आज आपकी कोई बात नहीं मानेंगे। तब उन्होंने उतनी ही जोर से कहा  था- मुनीश्वर, आज मैं रोकने नहीं तुम्हारे साथ चलने आया हूं। यहीं से आंदोलन की दिशा और तेज हो गई थी। और आंदोलन सफल भी हुआ था। डा. गौतम के कार्यकाल के  दौरान ईएमओ रहे डा. राजीव लोचन शर्मा कहते हैं कि उनके साथ काम करके सुखद अनुभूति होती थी।

मेरी बात मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार…

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts

जहर बन गया कफ सिरप ! लिमिट और परसेंट आफ प्योरिटी टेस्ट हुआ था क्या?  

सिरप में फार्मेसी ग्रेंड नहीं, इंडस्ट्रियल पालीथिलीन ग्लाइकोल का प्रयोग होने की आशंका 50 प्रतिशत और इससे अधिक के कमीशन के लालच में ऐसे ही जहर बनती रहेंगी जीवनरक्षक दवाएं राजेश मिश्रा, आगरा: भारत में निर्मित कफ सिरप के सेवन से गबिया में 2022 में…

Load More Posts Loading...No More Posts.