Health

आगरा में 260 करोड़ रुपये में बिका अस्पताल, अब तक का सबसे महंगा सौदा

-ग्रेटर नोयडा के ग्रुप ने खरीदा, अभी हैं 150 बेड, 250 बेड तक होगा विस्तार

-अब तक आगरा के आधा दर्जन अस्पताल और एक पैथोलॉजी लैब

पहुंच चुके हैं बडे-बड़े ग्रुप के हाथों में

राजेश मिश्रा, आगरा: विशालकाय, बहुमंजिला और चमचमाती इमारत, विश्वस्तरीय उपकरण, विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम, प्रशिक्षित पैरा मेडिकल स्टाफ। बड़े जोर-शोर से कारपोरेट कल्चर पर संचालित हो रहे बड़े-बड़े अस्पताल अब वेंटीलेटर पर आने लगे हैं। उधर, बड़े-बड़े निवेशकों के बूते अस्पताल संचालन क्षेत्र में कूद पड़े ग्रुप ऐसे अस्पतालों पर निगाहें गड़ाने लगे हैं। आगरा में एक ऐसे ही  अस्पताल को ग्रेटर नोएडा के ग्रुप ने हाल में ही 260 करोड़ रुपये में खरीद लिया है। आगरा में किसी अस्पताल का ये सबसे बड़ा सौदा माना जा रहा है। इस सौदा के साथ ही इस ग्रुप ने दिल्ली, एनसीआर के बाद उप्र में भी अपने पैर जमाने शुरू कर दिए हैं।

 हाईवे पर सिकंदरा क्षेत्र स्थित इस अस्पताल को अभी कुछ ही वर्ष हुए हैं। कारपोरेट कल्चर पर संचालित ये अस्पताल कुछ ही वर्षों में चर्चित और प्रचलित हो गया। मगर, तमाम कारणों से नियमित संचालन में बाधाएं आने लगीं। कई महीनों से इसके बिकने की चर्चाएं चल रही थीं। एक वेबसाइट के अनुसार, अब इस अस्पताल का सौदा हो गया है। इसे ग्रेटर नोएडा के ग्रुप ने 260 करोड़ रुपये में पूरी तरह से खरीदा है। एक लाख 65 हजार वर्ग फीट एरिया में संचालित इस अस्पताल में वर्तमान में 150 बेड हैं जिसे 250बेड तक विस्तारित किया जा सकेगा।  

जिस ग्रुप ने ये अस्पताल खरीदा है, उसे हेल्थ केयर क्षेत्र में बहुत बड़ा खिलाड़ी माना जाता है। खास बात ये है कि इसके सर्वेसर्वा ने आगरा के एसएन मेडिकल कालेज से ही चिकित्सा की शिक्षा ली है। नोयडा में स्थापित पहले अस्पताल के बाद ग्रुप ने दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद के बाद हाल में ही झांसी और फिर आगरा के इस अस्पताल को खरीदा है। इस सौदा के बाद ग्रुप के पास करीब डेढ़ हजार बेड की क्षमता हो जाएगी।

आगरा में इससे पहले भी कई बड़े अस्पताल बड़े ग्रुप के हाथों बिक चुके हैं। इनमें हाइ्वे स्थित अपोलो पंकज हास्पीटल, नयति हेल्थ केयर प्रमुख हैं। संजय प्लेस स्थित जीजी हास्पीटल और हरीपर्वत क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध पैथोलॉजी लैब भी बिक चुकी है। लैब को कुछ महीने पहले ही मुंबई की एक कंपनी ने खरीदा है। भगवान टाकीज के पास स्थित एक अस्पताल लगभग बंद हो चुका है। इसके भी बिकने की चर्चाएं जोरों पर हैं।

सरकारी नीतियां हैं जिम्मेदार, इंश्योरेंस का रहेगा बोलबाला

अस्पतालों के बिकने की स्थिति के लिए चिकित्सा जगत के जानकार सरकारी नीतियों को जिम्मेदार मान रहे हैं। कहते हैं कि एक अस्पताल संचालन के लिए पंजीकरण प्रक्रिया ही थकाने वाली होती है। इसके अलावा कई विभागों की  एनओसी के लिए क्या-क्या नहीं करना पड़ता। इसके साथ ही हर महीने विभागों को सुविधाशुल्क आर्थिक रूप से मजबूत होने ही नहीं देती। अगर यही स्थिति रही तो  छोटे-छोटे अस्पताल के लिए संचालन तो और भी दूभर हो जाएगा। जानकार कहते हैं कि बड़े ग्रुप्स के पदार्पण से हेल्थ केयर में इंश्योरेंस का बोलबाला और हो जाएगा। ये बड़े खिलाड़ी हैं और इन्हें पता रहता है कि कब किससे और कैसे निपटना है। स्थानीय स्तर पर संबंधित विभाग इनके आगे भीगी बिल्ली बन जाते हैं।

मेरी बात मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार…

1 Comment

  1. Yogesh jadon says:

    अब खुद को बड़े कहने वाले अखबार इस खबर के पीछे दौड़ेंगे

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