Health

ये तो एक्सपायर्ड दवाओं को भी जीवनरक्षक बना देते हैं, ऐसे शैतान हैं नकली दवा के सौदागर

– स्कैनर के माध्यम से बदल देते हैं एक्सपायरी डेट

-डीएम की बैठक में फोरेंसिंक कंसल्टेंट ने खोले राज

राजेश मिश्रा, आगरा: शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में एक बैठक हो रही थी। जिलास्तरीय एनसीसीओआरडी इस कमेटी की अध्यक्षता कर रहे थे जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी। बैठक में नकली और नशीली दवाओं के सिंडीकेट पर चर्चा हुई। फोरेंसिंक कंसल्टेंट ने बताया कि ये सिंडीकेट को इतना शैतान है कि एक्सपायर्ड दवा को भी जीवनरक्षक बना कर मरीजों की जिंदगी को खतरे में डालते हैं। स्कैनर की मदद से रैपर पर प्रिंट एक्सपायर डेट बदल कर बाजार में खपा देते हैं।

पूर्व डीजीपी गुजरात व फोरेंसिक कंसल्टेंट केशव कुमार की इन बातों में दम था। एक तो उनका अनुभव और दूसरा फव्वारा दवा बाजार का इतिहास। फव्वारा दवा बाजार में तमाम ऐसे घाघ और ठीट दुकानदार हैं जो एक्सपायर्ड दवाओं को पुन: जीवित कर बाजार में खपा चुके हैं। विगत में तमाम ऐसे मामलों का खुलासा हो चुका है। फोरेंसिक कंसल्टेंट केशव कुमार ने एक बात और कही। बताया कि नकली, नशीली दवाओं के कारोबार में संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध मात्र 02 प्रतिशत दोष सिद्धि हो पाती है तथा रेजोल्व केस का 5.9 प्रतिशत है। दवा बाजार में वर्षों से निरंतर छापे, नमूने और उनकी जांच, कागजी कार्रवाई के बाद भी सौदागरों के कुनबे लगातार बढोत्तरी कंसल्टेंट की बात का समर्थन करती है।

 पूर्व डीजीपी और फोरेंसिक कंसलटेंट केशव कुमार ने बताया कि नशीली, नकली दवाओं के संगठित कारोबारी आधुनिक तकनीकी तथा विभिन्न उपायों का प्रयोग करते हैं। उन्होंने समझाया कि एक्सपायर दवाओं, पैक्ड खाद्य पदार्थों की एक्सपायरी डेट स्कैनर के माध्यम से बदल दी जाती है। उन्होंने इन पर अंकुश का तरीका भी बताया। कहा कि जब भी रैकेट पकड़ा जाए तो विभिन्न विभागों यथा ड्रग, पुलिस, नगर-निगम, जीएसटी, श्रम विभाग, आयकर, खाद्य व औषधि प्रशासन आदि विभागों द्वारा संयुक्त कार्यवाही की जाए, जिससे नशीली, नकली दवाओं के संगठित कारोबार में पकड़े जाने वालों के विरूद्ध कार्यवाही की जाए, तो न्यायालय में आरोपियों के विरूद्ध दोष सिद्धि शत-प्रतिशत की जा सकती है। उन्होंने नशीली, नकली दवाओं के संगठित कारोबार के विभिन्न पहलूओं, ट्रान्सपोर्टेशन सिस्टम, डिजिटल ऑटोप्सी, भुगतान प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। जनपद में भारी मात्रा में नकली दवाओं के पकड़े जाने के दृष्टिगत नकली दवाओं के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु अन्तर विभागीय समन्वय स्थापित कर समेकित प्रभावशाली कार्यवाही करने की बात कही।

कार्यशाला के बाद अब कार्रवाई का इंतजार

बैठक के बाद आखिर जिलाधिकारी ने नशीली, नकली दवाओं के विरुद्ध सभी सम्बन्धित विभागों को समन्वय स्थापित कर प्रभावशाली कार्यवाही करने के निर्देश तो दिए हैं। मगर, सवाल फिर खड़ा होता है कि आखिर कार्रवाई कब होगी? कौन इसकी कमान थामेगा? क्या वो प्रशासनिक अधिकारी जिनके पास औषधि एवं खादय विभाग का प्रभार है। मगर, इन प्रशासनिक अधिकारी को फव्वारा दवा बाजार में अब तक जाने की फुरसत ही नहीं मिली। जबकि यहां पर आठ से ज्यादा दिनों से चल रही जांच-पड़ताल से पूरे प्रदेश में हलचल मच चुकी है। एक करोड की रिश्वत के आफर ने तो देश-दुनिया में सुर्खियां बटोर लीं। मगर, इन अधिकारी महोदय की सेहत पर कोई असर भी नहीं पड़ा है। हाथ कंगन को आलसी क्या…  अभी  फव्वारा दवा बाजार में दुकानों और गोदामों की जांच चल रही है। डीएम के आदेश पर अगर गंभीरता दिखाई गई तो अंतर विभागों के अधिकारी कल ही इस जांच में शामिल हो जाएंगे। और ये प्रशासनिक अधिकारी में  अगर लेशमात्र भी स्वेच्छा हो तो खुद ही अगुवाई इस आपरेशन को अंजाम तक पहुंचा सकते हैं।  इससे उनका नाम तो रोशन होगा ही, प्रशासन भी एक मिसाल कायम करेगा।

मेरी बात मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार…

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