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चोर नहीं, चोर की अम्मा को पकड़ते तो नकली दवा न बनती और न बिकती

-चार दशक पहले देवास की फैक्ट्री से दवा लेकर चला ट्रक इंदौर में हुआ था हाइजेक, आगरा का एक सौदागर था मास्टरमाइंड

-एंटी बायटिक इंजेक्शन की खेप पूरे देश में कर दी थी सप्लाई, दो साल बाद विशेष जांच में हुआ था खुलासा

– जेनेरिक दवा बनाने वाली एक नामी कंपनी के नाम से मल्टी विटामिन कैप्सूल में पाया गया था बेसन

राजेश मिश्रा, आगरा: शुक्रवार 23अगस्त की सुबह स्थानीय समाचार पत्रों में अंक में एक खबर ने झकझोर दिया। नामी कंपनी के नाम पर नकली दवा बेचने की शिकायत पर औषधि विभाग ने दो मेडिकल स्टोर और गोदाम सील किए। बेशक, इस कार्रवाई के लिए औषधि विभाग ने अपनी पीठ थपथपाई होगी लेकिन, मेरे नजरिए से ये उनके लिए शर्म करने वाली बात है। शिकायत पर छापा मारा तो रुटीन में विभाग क्या करता है? ऐसा भी नहीं  है कि उन्हें दवा बाजार की नस-नस नहीं पता है। उनके मुखबिर दवा बाजार के कदम-कदम पर हैं। पहले की  तरह इस कार्रवाई में भी कुछ विशेष होगा, मुझे नहीं लगता। ऐसा इसलिए लगता है कि विगत में भी ऐसा ही होता रहा है। समय-समय पर चोर तो कई पकड़े गए और छोड़  दिए गए। लेकिन, कभी उनकी अम्मा को पकड़ने को जरूरत नहीं समझी गई। और इसीलिए नकली और घटिया दवा के इस धंधे ने आगरा के फव्वार क्षेत्र को पूरे देश में कुख्यात कर दिया।

चार दशक पहले की घटना है। मध्य प्रदेश के देवास स्थित देश की नामी फैक्ट्री से एंटीबायटिक इंजेक्शन की खेप लेकर एक ट्रक रवाना हुआ। इस खेप की अनुमानित तब कीमत 15 करोड़ रुपये थी। इंदौर में ये ट्रक लापता हो गया। रिपोर्ट हुई। जांच हुई। कंपनी मालिक की पैरवी से विशेष दल ने जांच की। दो साल की जांच के बाद पता चला कि आगरा के इसी फव्वारा क्षेत्र में दवा की दुकान के संचालक ने ये साजिश रची थी। कंपनी का ही एक अधिकारी मिल गया था। इस दुकानदार ने तब तक इंजेक्शनों की ये खेप पूरे देश में सप्लाई कर दी थी।

 एक और घटना। जेनेरिक दवा बनाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनी के नाम से मल्टी विटामिन कैप्सूल का बड़ा जखीरा आगरा के फव्वारा में पकड़ा गया। इस कैप्सूल का परीक्षण कराया गया। इसमें  बेसन भरा पाया गया था। यानी, सौदागरों ने इलाज के नाम पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया था। बाजार के जानकार बताते हैं कि इन कैप्सूल की फिलिंग से लेकर रैपरिंग तक आगरा में ही हुई थी। इसमें सौदागर साफ बचा लिए गए थे।

जो दुकान-दुकान बेचते थे दवा, अब कारोबारी

चार दशक में फव्वारा दवा बाजार ने कई बदलाव देखे हैं। नकली और घटिया दवा के धंधे के कलंक से बेफिक्र यहां कई चेहरे चमक गए। जो हाकर दुकान-दुकान जाकर आर्डर लेते थे और दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र से दवा मंगाकर सप्लाई करते थे, आज कारोबारी बन चुके हैं। जानकार बताते हैं कि इन हाकरों के जरिए नकली दवा के सौदागरों ने लंबा गेम खेला है। इस गेम को समझने के बाद हाकर भी मैदान में उतर गए और देखते ही देखते चेहरे की रंगत ही बदल गई। इससे की कमाई से दूसरे धंधे शुरू कर दिए। एक हाकर का दिल्ली हाईवे पर बना होटल तो काफी चर्चा में रहा था। कमला नगर में भी ऐसे ही कई चेहरों की पहचान अब बदल चुकी है।

मेरी बात मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार…

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