राजेश मिश्रा, आगरा: पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फार्मूले पर चल रही समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दलितों की राजधानी आगरा में बड़ा धमाका करने की तैयारी में है। अगर तैयारी को मूर्तरूप मिला तो ये धमाका ऐसा होगा कि प्रदेश भर में दलित वोटों को लेकर खलबली मच जाएगी।
पूर्व सांसद और सपा के वरिष्ठ नेता रामजीलाल सुमन को राज्यसभा भेजकर सपा ने दलित प्रेम का संकेत दे दिया था। राणा सांगा पर बयान के बाद करणी सेना प्रकरण के बाद सांसद सुमन देश भर में चर्चा में आ गए थे। शुरुआत में सपा ने बयार का रुख भांपा और फिर सांसद सुमन को खुली छूट दे दी। इसके बाद आगरा के आसपास के जिलों में जहां-जहां दलित उत्पीड़न के मामले प्रकाश में आए, सांसद सुमन को वहां जाने से रोकने के लिए नजरबंदी कर दी गई। प्रशासन की ये बंदिश सांसद सुमन की लोकप्रियता बढ़ाने के काम आई। तमाम बंदिशों के बाद भी सांसद सुमन अपने मिशन में आगे बढते रहे। सपा के रणनीतिकारों का मानना है कि इस माहौल ने दलितों का रुझान सपा की ओर बढ़ाने का काम किया है। ऐसे ही माकूल सियासी सिलसिले को सपा एक और पायदान पर पहुंचाने की जुगत में है।
राजनीति में आगरा को दलितों की राजधानी कहा जाता है। पीडीए के मुख्य पिलर दलित पर सपा ऐसा दांव खेलने की तैयारी में है कि आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों का मजबूत आगाज बने। पार्टी जानकारों के अनुसार, सपा चाहती है कि आगरा में दलित महासम्मेलन का आयोजन किया जाए। ये महासम्मेलन ऐसा हो कि पूरे प्रदेश के दलित वर्ग में सपा की पैंठ मजबूत बन जाए। महासम्मेलन का जो प्रस्तावित ब्लूप्रिंट बनाया गया है उसके तहत महासम्मेलन के सर्वेसर्वा तो पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव होंगे ही, आयोजन की बागडोर सांसद रामजीलाल सुमन को सौंपी जा सकती है। इसके साथ ही दलित वर्ग के सपा के अन्य सांसद और प्रमुख पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में दलितों को महासम्मेलन में लाने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। साथ ही ये जिम्मेदार पदाधिकारी पूरे प्रदेश के दलित मतदाताओं को महासम्मेलन में बुलाने के लिए पूरी ताकत झोंक देंगे। पार्टी के रणनीतिकार इस प्रस्तावित महासम्मेलन के ब्लू प्रिंट पर चिंतन-मनन कर रहे हैं। बदलाव और सुधार की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। रूपरेखा तय होने के बाद ही महासम्मेलन की तारीख की घोषणा की जाएगी।
आगरा में ही दलित महासम्मेलन करने के पीछे सपा के अपने तर्क भी बताए जाते हैं। सपा आयोजन के लिए आगरा को भाग्यशाली मानती है। विगत में जब जब पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन हुए, प्रदेश में सत्ता हासिल हुई। दूसरा, आगरा में दलित सम्मेलन का संदेश पूरे प्रदेश को प्रभावित करेगा।
कौम वही, कोई और हो सकता है महानगर अध्यक्ष
सपा नेतृत्व ने कुछ महीने पहले आगरा जिला और आगरा महानगर कार्यकारिणी भंग कर दी हैं। जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष भी निवर्तमान हैं। अब तक नए पदाधिकारियों की घोषणा नहीं हो पाई है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि निवर्तमान दोनों पदाधिकारियों के रिपीट होने की संभावना न के बराबर है। इसके पीछे नेतृत्व की बहुत नाराजगी बताई जा रही है। हां, महानगर अध्यक्ष मुस्लिम बिरादरी का ही बनाया जाएगा, ये लगभग तय हो चुका है। इस पद के लिए एक पूर्व महानगर अध्यक्ष के पुत्र का नाम सबसे ऊपर बताया जा रहा है। पार्टी में ये काफी सक्रिय भी हैं। जिलाध्यक्ष पद के लिए पार्टी नेतृत्व बहुत सोचविचार कर ही नाम तय करेगा। कुछ नाम भेजे गए हैं लेकिन, मुखिया इन नामों पर सहमत नहीं हैं। पार्टी सूत्र बताते हैं कि आगरा को लेकर पार्टी मुखिया बहुत गंभीर हैं और संगठन को सक्रिय, निष्ठावान और रचनात्मक कार्यशैली वाले हाथों में सौंपना चाहते हैं।
मेरी बात
मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार पत्र समूह से सेवानिवृत्त होने तक के पत्रकारिता के सफर के दौरान कई पड़ाव पार किए, कई पायदान चढ़े। समाज के विभिन्न वर्गों की रिपोर्टिंग की। सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं से भरे पहलू मेरी पत्रकारिता के प्रमुख आधार रहे। संप्रति में दैनिक भास्कर समूह से जुड़कर अपनी पत्रकारिता के नए दौर में प्रवेश रखा है। अब कुछ अलग करके दिखाने की तमन्ना है। हमारे आसपास ही तमाम ऐसे कार्यकलाप होते हैं जो जनहित और समाजहित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, निभा सकते हैं लेकिन स्पष्ट कहूं तो कूपमंडूकता के कारण हम यहां तक पहुंच नहीं पाते, जान नहीं पाते। हम ऐसे ही अदृश्य व्यक्तित्व और कृतत्व को आपके सामने लाने का प्रयास करेंगे।
जय हिंद












शानदार रिपोर्ट भाईसाहब 👍👍