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प्रकृति का पर्यावरण को सपोर्ट

ये अचरज कैलाश घाट का है। यमुना नदी के अलौकिक और अनुपम दृश्य की चर्चा सुनते सुनते खुद को रोक ना पाया और पहुंच गया कैलाश घाट पर। महादेव के दर्शन किये, जाने-अनजाने में हुई गलती के लिये क्षमा मांगी। फिर घाट पर पहुंच निहारने लगा जीवनदायिनी यमुना को। धर्म ग्रंथों में जैसा लिखा है , विद्वजन ने जैसा बताया, वैसा ही स्वरूप था। इसी बीच एक वृक्ष पर नजर गई। इसकी दो प्रमुख टहनियां जिस तरह से सपोर्ट कर रही हैं , अचरज भरा है। मगर प्रकृति में तो ऐसे अचंभे होते ही रहते हैं।
जय भोले नाथ 🙏

मेरी बात मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार…

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