आवारा कुत्तों का आतंक है। हमले की कई घटनाएं प्रकाश में आती रहती हैं। आगरा नगर निगम ने कुत्तों को पकड़ने, बन्धयाकरण करने का अभियान छेड़ा हुआ है। हमारी कालोनी में भी आवारा कुत्ते हैं। टीम आज आई थी। मन में जिज्ञासा हुई कि कैसे कुत्तों को पकड़ लेते हैं। काटने का डर नहीं लगता आदि आदि सवाल कौंधे। टीम सदस्य प्रन्शु (कानपुर )और संदीप (चित्रकूट )ने कुत्तों के बारे में जानकारी दी।
@ आवारा कुत्ते पकड़ने के लिये इन्होंने दिल्ली में छः महीनों कि ट्रैनिंग ली। एक विशालकाय फील्ड में तमाम कुत्ते रखे जाते हैं। इनमें से किसी एक चिन्हित कुत्ते को पकड़ना होता है।
@ ट्रैनिंग में इन्हें अनुभव हुआ कि हमला करने वाला कुत्ता बहुत शातिर होता है। आपसे नजर नहीं मिलाएगा
@ जो कुत्ता आपको देखते ही दुम हिलाए आपसे नजर ना चुराए समझ लो कि हमला तो नहीं करेगा
@ ये लोग दिल्ली जयपुर कानपुर आदि शहरों में कुत्ते पकड़ चुके हैं लेकिन इनके अनुसार आगरा के कुत्ते बहुत शातिर और आक्रामक हैं।
मेरी बात
मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार पत्र समूह से सेवानिवृत्त होने तक के पत्रकारिता के सफर के दौरान कई पड़ाव पार किए, कई पायदान चढ़े। समाज के विभिन्न वर्गों की रिपोर्टिंग की। सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं से भरे पहलू मेरी पत्रकारिता के प्रमुख आधार रहे। संप्रति में दैनिक भास्कर समूह से जुड़कर अपनी पत्रकारिता के नए दौर में प्रवेश रखा है। अब कुछ अलग करके दिखाने की तमन्ना है। हमारे आसपास ही तमाम ऐसे कार्यकलाप होते हैं जो जनहित और समाजहित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, निभा सकते हैं लेकिन स्पष्ट कहूं तो कूपमंडूकता के कारण हम यहां तक पहुंच नहीं पाते, जान नहीं पाते। हम ऐसे ही अदृश्य व्यक्तित्व और कृतत्व को आपके सामने लाने का प्रयास करेंगे।
जय हिंद















