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जोमेटो डिलीवरी बॉय, रेस्टोरेंट और रात

सोमवार रात के 3 बजे हैं। पत्नी की एक सर्जरी हुई है, बाईपास स्थित एक हॉस्पिटल में भर्ती हैं। मैं तीमारदारी में था। रात को नींद तो आदतन आनी नहीं थी सो, बाहर आ गया चाय पीने। लाल रंग की jaket पहने एक युवक से मुलाकात हुई। ये जोमेटो के समर्पित कर्मचारी प्रतीत हुए। बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तो एक डिलीवरी बॉय के अनसुने पहलुओं से सामना हुआ। ये हैं राहुल सिंह सिसोदिया। मूल रूप से बरेली निवासी और अब आगरावासी। पहली उत्सुकता कि शायद घर जा रहे होंगे। बोले, अभी कहां! चार बजे तक डिलीवरी देनी है। थोड़ा कुरेदा तो रात में फूड डिलीवरी की कहानी शुरू हो गई।

पिज्जा, बर्गर आदि बनाने वाले कई रेस्टोरेंट रात चार बजे तक खुले रहते हैं। स्टूडेंट्स, मेडिकल कालेज में जूनियर डॉक्टर, इंजीनियर, रात के खाने के नियमित ग्राहक हैं। कुछ कालोनियों में भी डिलीवरी की जाती है। बाईपास पर भगवान टाकीज के पास नॉनवेज का एक ऐसा स्टाल है, जहां के स्वाद के आगरा में प्रवास कर रहे हैदराबादी मुरीद हैं। पूरी रात डिलीवरी बॉय की बाइक दौड़ती रहती हैं। राहुल ने बताया कि आगरा में लगता ही नहीं कि रात भी होती है। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के कई आफिस रात रात भर खुले रहते हैं। कई कस्टमर ऐसे हैं जो अक्सर तीन बजे के बाद ही ऑर्डर देते हैं।

कभी दुत्कार तो कभी प्रोत्साहन भी

राहुल ने बताया कि हर तरह के लोग मिलते हैं। एक फ्लैट में मैडम इसी बात से नाराज हो गईं कि गार्ड से बात क्यों नहीं कराई? एक बार आर्डर के बहाने टेडी बगिया में बाइक और मोबाइल लूटने की कोशिश हो गई। कभी कभी लोग डिलीवरी से लौटने के बाद कंपनी को tip ट्रांसफर कर देते हैं। राहुल कहते हैं कि हम हर हाल में खुश रहते हैं। कस्टमर का अपना अपना नजरिया होता है, सोच होती है।

ऐसे ही कौन दौड़ता है साहब

राहुल सुबह 10 बजे से घर से निकले हैं। चार बजे के बाद घर लौटेंगे। ये उनका रोज का शेड्यूल है। इतनी मेहनत? राहुल ने कहा कि मेहनत करता हूं, कंपनी के प्रति पूरी निष्ठा रखता हूं।अच्छी आय हो जाती है। तो दौड़ने में मजा आता है। रात में अच्छी आय होती है। क्यों? बताया कि रात में डिलीवरी देने पर प्रति किलोमीटर 20 रुपए मिलता है। दिन में 10 से लेकर 15 रुपए तक ही मिलता है। एक दिन में करीब 200 किमी बाइक चल जाती है।

मेरी बात मैनपुरी के एक छोटे से गांव से आकर आगरा महानगर में एक कदम रखने का प्रयास किया। एक अनजान युवक को अपना ठौर-ठिकाना बनाने की चुनौती थी। दैनिक जागरण जैसे विश्व प्रसिद्ध समाचार समूह ने सेवा करने का सुअवसर प्रदान किया। 9 जुलाई 2025 को दैनिक जागरण समाचार…

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